वाराणसी, 11 अगस्त 2025:
देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक काशी विश्वनाथ धाम को अब पूरी तरह से प्लास्टिक मुक्त क्षेत्र घोषित कर दिया गया है। मंदिर प्रशासन ने यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण और मंदिर परिसर की स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए लिया है। यह नियम 10–11 अगस्त 2025 से प्रभावी हो गया है।
Table of Contents
🔹 क्या है नया नियम?
अब मंदिर परिसर में प्लास्टिक का कोई भी सामान—जैसे कि:
प्लास्टिक लोटा
पॉलीथिन
प्लास्टिक की टोकरी
प्लास्टिक पैकिंग वाली पूजा सामग्री
ले जाना पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया गया है।
श्रद्धालुओं को अब केवल तांबे, पीतल या स्टील के पात्रों में जल या दूध लाने की अनुमति होगी।
🔹 क्यों लिया गया यह निर्णय?
मंदिर प्रशासन के अनुसार:
प्लास्टिक कचरे से परिसर में सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही थी।
अंडरग्राउंड नालियों में जाम की समस्या उत्पन्न हो रही थी।
श्रद्धालुओं को भी बार-बार सफाई को लेकर परेशानी झेलनी पड़ती थी।
इसलिए अब इसे स्थायी तौर पर प्लास्टिक मुक्त क्षेत्र घोषित कर दिया गया है।
🔹 श्रद्धालुओं से अपील
प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे:
केवल प्राकृतिक या पुनः उपयोग योग्य सामग्री का उपयोग करें।
जूट की टोकरी या लकड़ी की थाली में पूजा सामग्री लेकर आएं।
पर्यावरण और मंदिर की गरिमा बनाए रखने में सहयोग करें।
🔹 रुद्राभिषेक पर असर
खबरों के मुताबिक, अब प्लास्टिक लोटों में जल या दूध लाने पर प्रवेश नहीं मिलेगा, जिससे रुद्राभिषेक जैसे पूजन कार्यों की लागत भी थोड़ी बढ़ सकती है। हालांकि, यह कदम मंदिर की पवित्रता और परंपरा को बनाए रखने के लिए जरूरी बताया जा रहा है।
निष्कर्ष:
काशी विश्वनाथ धाम का यह फैसला न केवल एक सकारात्मक पर्यावरणीय पहल है, बल्कि यह आने वाले समय में अन्य धार्मिक स्थलों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है। अब यह हम सभी श्रद्धालुओं की जिम्मेदारी है कि हम इस पहल में सहयोग दें और प्लास्टिक मुक्त भारत की दिशा में एक मजबूत कदम बढ़ाएं।